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Suresh Koundal 'Shreyas'

Abstract Classics

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Suresh Koundal 'Shreyas'

Abstract Classics

दर्द- ए- इश्क़

दर्द- ए- इश्क़

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ठहर जा तू मेरे ए दोस्त 

ज़रा सा शाम होने दो।

चलते हैं ज़रा रुक कर,

खत्म ये जाम होने दो।


शरीफों की इस बस्ती में,

सलीके से बहुत रह लिए।

इश्क़ में टूटे आशिक को 

ज़रा बदनाम होने दो।


शहर में चर्चा ए दौर था,

कभी मेरे इश्क़ का।

हुए मशहूर मुहब्बत में,

ज़रा गुमनाम होने दो।


वो आते थे कभी मिलने,

छुप छुप कर ज़माने से।

नही परवाह किसी की अब,

मुलाकातें शरेआम होने दो।


बड़ी शिद्दत से चाहा था,

उस सनम हरजाई को।

परवाहें की बहुत मैंने,

अब खुद से अनजान होने दो।


बहुत धड़का है मेरा दिल,

इश्क़ में उस बेवफा के।

तड़पते लाचार इस दिल को, 

ज़रा बेजान होने दो।


जताना छोड़ दिया मैंने,

हक़ मेरी मोहब्बत का।

बफायें हो गईं काफी, 

ज़रा बेईमान होने दो।


थमते अब नही आंसू,

जब आते याद वो मुझको।

छलकती आंखों में ही सही,

यादों को संजोने दो।


ठहर जा तू मेरे ए दोस्त 

ज़रा सा शाम होने दो।

चलते हैं ज़रा रुक कर,

खत्म ये जाम होने दो।


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