STORYMIRROR

Sheetal Jain

Abstract

4  

Sheetal Jain

Abstract

दोस्ती

दोस्ती

1 min
289

समय जो हाथ से फिसलता जा रहा है,

यह न समझो कि व्यर्थ जा रहा है,

 शब्दों का रूप ले, पृष्ठ पर उतरता जा रहा है 

 बहुत अनकही वो बातें कहता जा रहा है।


 मेरे दिल का भार, अपने ऊपर ले 

 हर शब्द दोस्ती निभा रहा है,

कैसे कह दूँ मैं, दुनिया में अकेला हूँ 

 हर पल मेरी रचना में, जब वह


जीवंत किरदार अदा कर रहा है।

 गर्वोन्मत हूँ ऐसी दोस्ती पर

 बिना किसी अपेक्षा के,चुपचाप 


मेरी कलम का साथ दे

 ज़िन्दगी जीना सिखा रहा है 

सुख दुख का एकमात्र साथी बन

 उद्देश्य से परिचय करा रहा है।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract