STORYMIRROR

Sneha Bawankar

Abstract

3  

Sneha Bawankar

Abstract

दोस्ती की पहचान

दोस्ती की पहचान

1 min
234

इस रोते हुए चेहेरे पर ,

मुस्कान सी आई है।


इस बेजान सी जिंदगी,

जान सी आई है ।


इस नाराज से चहरेपर ,

सौगात सी आई है।


तुम्हारी एक बार बात करने से,

स्वर्ग की आभा ही तूने दिखाई है।


आंसू को हंसी मे बदलने की,

तूने आस ये जगाई है।


प्यार की सौगात लेकर, 

जो तूने मुझे संभाला है।


हर एक कदम पे मैने,

तुझे मेरी जिंदगी में समाया है ।


नाज़ है खुदपर ही मुझे ,

जो तेरे जैसा दोस्त मैने पाया है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract