Buy Books worth Rs 500/- & Get 1 Book Free! Click Here!
Buy Books worth Rs 500/- & Get 1 Book Free! Click Here!

Sanjay Verma

Inspirational


2  

Sanjay Verma

Inspirational


दोस्त

दोस्त

1 min 274 1 min 274


दस्तक मेरे दरवाज़े पर 

चहकने की तुम देती गौरैया

चाय, बिस्कुट लेता मैं

तुम्हारे लिए रखता 

दाना-पानी

यही है मेरी पूजा 


मन को मिलता सुकून 

लोग सुकून के लिए 

क्या कुछ नहीं करते

ढूंढते स्थान

गोरैया का घोंसला

मकान के अंदर

क्योंकि वो संग रहती

इंसानों के साथ

हम खाये और वो घर में

रहे भूखी


ऐसा कैसे संभव

दान और सुकून 

इन्हें देने से स्वतः 

आपको मिलेगा

हो सकता है हम

अगले जन्म में बने

गोरैया

और वो बने इंसान

दोस्ती - सहयोग

कर्म के रूप में

साथ रहेंगे



Rate this content
Log in

More hindi poem from Sanjay Verma

Similar hindi poem from Inspirational