STORYMIRROR

Sanjay Verma

Inspirational

3  

Sanjay Verma

Inspirational

जल की पाती

जल की पाती

1 min
375

जल कहता है

इंसान व्यर्थ क्यों ढोलता है मुझे

प्यास लगने पर तभी तो

खोजने लगता है मुझे ।


बादलों से छनकर मैं

जब बरस जाता

सहेजना ना जानता

इंसान इसलिए तरस जाता।


ये माहौल देख के

नदियाँ रुदन करने लगती

उनका पानी आंसूओं के रूप में

इंसानों की आँखों में भरने लगती।


कैसे कहे मुझे व्यर्थ न बहाओ

जल ही जीवन है

ये बातें इंसानों को कहाँ से

समझाओ ।


अब इंसानों करना

इतनी मेहरबानी

जल सेवा कर

बन जाना तुम दानी।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational