दोस्त सही
दोस्त सही
वो दिन किसी त्योहार से कम नहीं
जब साथ में हो अपना दोस्त सही
वो दिन किसी दीवाली से कम नहीं
जब साथ में हो अपना दोस्त रवि
मिट जाता है, तब तन-मन का तम,
जब साथ होता कर्ण सा दोस्त सही
वो दिन किसी उत्सव से कम नहीं
जब साथ में हो अपना दोस्त सही
खिलता है, पतझड़ में बसंत-बहार,
जब होता, कृष्ण जैसे मित्र का साथ,
खिलता सुदामा का मुखमंडल वही
जैसे सूर्य की भोर लालिमा की छवि
वो दिन किसी त्योहार से कम नहीं
जब साथ मे हो अपना दोस्त सही
उसका खत्म हो जाता है, ग्रह शनि
पृथ्वी के पास हो चाँद सा मित्र सही
जहाँ होती निःस्वार्थ दोस्ती की बही
वो जगह किसी जन्नत से कम नहीं
वो दिन किसी त्योहार से कम नहीं
जब साथ में हो अपना दोस्त सही
