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ViSe 🌈

Inspirational

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ViSe 🌈

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दो जन्म

दो जन्म

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फूटे कंठ से रुदन के प्याले ,

घर आँगन में बिखरे जाएं ,

जिस-जिस के भी घर में जाएं,

उस घर से ही न्योते आएं,

सब कोई जन्म की ख़ुशी मनाये,

सब कोई उसको गीत सुनाए,

उस पल चन्द्रमा प्रभा निचोड़े,

वो भी ख़ुशी में शरीक हो जाये,

सुबह जो सूरज आनन दिखाए,

सब एक पल नतमस्तक हो जाएं,

लल्ला का मुख देखे जाएं,

 माटी पर जब पग वो रखे,

माटी को छूकर चूमे जाएं,

रेनू के इन टुकड़ों को ,

अपनी गोद में समेटे जाएं ,

विनय विनोद वात्सल्य के विटप,

आज लहराए पत्र हज़ार ,

जब फूटे कंठ से रुदन के प्याले। 


वृक्ष जो पनपा,

पत्र मुरझाये,

तब सबने उसको पाठ पढ़ाये ,

जीवन के कठोर सत्य सिखाये ,

अब देखो कैसे उस तरोवर पर,

लाखों मृदु फल उग आये,

वो फल जब गिरने लगते हैं,

तो मन कटघड़े में खड़ा करते हैं,

अपने जन्म पर सवाल करते हैं,

अपने मकसद की तफ्तीश करते हैं,

तब सब उसको दिलाने याद,

उसका मकसद आते हैं,

उसको जीवन दर्शन कराते हैं,

तभी माता-पिता कहलाते हैं,

उसकी विलक्षण छवि से ,

उसके गुरु आज उसे मिलाते है,

कुछ राह चलते पैगम्बर,

उसे सपनों के पंख लगाते है,

आज जब उसे आभास हुआ,

की क्यों वो जगत में आया है ,

तो वो चंद्र, सिरज, धरा और मिटटी,

उसको सलाम करने आते हैं,

आज वो जमकर हस्ता है,

 ज्ञान के अश्रु से मुख धोता है,

आज फिर एक अग्नि उसके अंतस में जली,

जब फूटे कंठ से रुदन के प्याले। 



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