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दो बच्चों का बाप हुआ मैं

दो बच्चों का बाप हुआ मैं

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दो बच्चों का बाप हुआ मैं

तू तुम से अब आप हुआ मैं।


बच्चों की मीठी बोली से

पापा का ही जाप हुआ मैं।


जब भी कोई रोता बच्चा

लोरी या मृदु थाप हुआ मैं।


बंद हुआ अब सैर-सपाटा

गृहस्थी का परिमाप हुआ मैं।


बच्चों की इच्छा के आगे

नतमस्तक चुपचाप हुआ मैं।


जिस दिन बच्चों को ना देखूँ

समझो विरहा ताप हुआ मैं।


बच्चों ख़ातिर कर्म करूँ तो

समझो पुण्य-प्रताप हुआ मैं।


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