दिमाग
दिमाग
आखिर मन की बात सुनी ही क्यों जाए
जब हर काम में लगाना ही हो दिमाग
मन का क्या है कभी यहां तो कभी वहां
एक जगह जब ठहर नहीं सकता मन तो
क्या गारंटी है जिंदगी में कामयाबी की
बचपन से बूढ़ा होने तक हर कदम पर
भटकाने के अलावा करता ही है क्या मन
बात अक्षर ज्ञान की हो या किसी खेल की
जीत हो या हार सब होता है दिमाग से ही
तब मन की बात सुनी ही क्यों जाए
गणित की जटिल गणनाओं का हल हो या
इतिहास की तारीखों की खंगालने की बात
बिना दिमाग के नहीं मिल सकती सफलता
कविता-कहानी लिखने की तो बात ही दूर
अब रही बात मन की तो कहना ही क्या
कहता है चलो दिलदार चलो चांद के पार चलो
अब जरा सोचिये बात अगर दिमाग साथ न दे
चांद की बात तो दूर जमीं पर चलना मुश्किल है
तब आखिर मन की बात सुनी ही क्यों जाए
जब हर काम में लगाना ही हो दिमाग.
