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Abhishek Singh

Abstract

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Abhishek Singh

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दिल लगी एक बुरी आदत !

दिल लगी एक बुरी आदत !

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दिल लगी है मेरी,

एक बुरी आदत।

कहीं भी कभी भी,

किसी से भी,

लग जाता है।


जब कोई प्यार से,

दो मीठे बोल,

बोल जाता है।

क्या क़सूर है अब इसमें मेरा

बेक़सूर है ये दिल मेरा।


कोई तो समझे मेरे,

इस दिल की लगी को।

आके मिटा दे,

दिल की इस कमी को।


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