दिल को दिवार होते देखना
दिल को दिवार होते देखना
झुकती हुई निगाहों को तलवार होते देखना
बुरा लगता है दिल को दिवार होते देखना
क्या कहा दुनियाँ से है तुम्हें वफ़ा की उम्मीद
हम भी चाहते थे किसी को वफादार होते देखना
फूल खुश्बू बिखेरते हुए ही अच्छा दिखता है
अजीब लगता है फूल को खूँ-ख्वार होते देखना
इश्क़ करना बुरा नहीं इश्क़-ए-इजहार भी बुरा नहीं
बुरा है तो खुद को इश्क़ में लाचार होते देखना
वैसे तो उसकी सादगी ही उसका लिबास है
पर अच्छा लगता है उसको तैयार होते देखना
दुनियाँ देखी लोग देखें और देखा लोगों का दिल
अब चाहते हैं खुद को बस बेकार होते देखना।
