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Dipanshu Asri

Abstract

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Dipanshu Asri

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दिल की ट्रैन

दिल की ट्रैन

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सिलसिला चला सफर का कुछ ऐसा 

ना जाने किस और मुकाम हैं 

ये हसीन वादिया मुझे बुला रहीं 

दिल की सुनना ही मेरा बस काम है


दूर अभी बहुत हैं वो रास्ता 

दूर अभी भी वो शहर और दुकान है 

ना जाने कितने फासले हैं अभी कुछ और 

ना जाने कितना दूर वो आसमान है


झठ से छूना चाहता हूँ उन्हें 

मेरे ज़हन में कई अरमान हैं 

मुझे भूख प्यास अब नहीं हैं लगती 

दूर हो रही मेरी अब वो थकान है


क्या सचमुच ऐसा होगा 

जहाँ होती सच सपनों की ज़ुबान हैं 

वो पहाड़, वो नदी, वो झरना, वो समुंदर 

कितना अनोखा ये मेरा हिंदुस्तान है।


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