STORYMIRROR

Kishan Negi

Abstract

4  

Kishan Negi

Abstract

दिल का दर्पण हैं खामोशियां

दिल का दर्पण हैं खामोशियां

2 mins
292

कभी कभी खामोशियाँ भी

दिल का हाल बयाँ कर देती हैं

हमसे हमारा ही परिचय करा देती हैं

और हम मशगूल रहते हैं

कभी ज़िन्दगी की ज़रूरतों में

कभी अपनों को मनाने में

कभी उलझनों को सुलझाने में

मगर सच ये भी है कि

हमने कभी ज़रूरत ही नहीं समझी 

अपनी खामोशियों को पढ़ने की

और ये भी इतना ही सच है कि 

हमें कभी फुर्सत ही नहीं मिलती 

इनसे गुफ़्तगू करने की

जिंदगी की कशमकश की दलदल में 

इतना धंस चुके हैं

चाहकर भी इस भूलभुलैया से 

कोई द्वार नज़र नहीं आता बाहर निकलने का

काश! हम समझ पाते कि खामोशियाँ 

हमारे ही दिल का दर्द हमें बताती हैं

दिल की हलचलों से हमें रूबरू कराती हैं

ये खामोशियाँ सिर्फ़ खामोशियाँ नहीं

हर दिल का दर्पण हैं

हर राज छिपा होता है इनके सीने में

बस कोई पढ़ने वाला चाहिए

कभी कभी खामोशियां भी

दिल का हाल बयां कर देती हैं

हमसे हमारा ही परिचय करा देती हैं

और हम मशगूल रहते हैं

कभी जिंदगी की जरूरतों में

केभी अपनों को मनाने में

कभी उलझनों को सुलझाने में

मगर सच ये भी कि

हमने कभी जरूरत ही नहीं समझी 

अपनी खामोशियों को पढ़ने की

और ये भी इतना ही सच है कि 

हमें कभी फुर्सत ही नहीं मिलती 

इनसे गुफ्तगू करने की

जिंदगी की कशमकश की दलदल

इतने धंस चूके हैं

चाहकर भी इस भूलभुलैया से 

कोई द्वार नजर नहीं आता बाहर निकलने का

काश! हम समझ पाते कि खामोशियां 

हमारे ही दिल का दर्द हमें बताती हैं

दिल की हलचलों से हमें रूबरू कराती हैं

ये खामोशियां सिर्फ खामोशियां नहीं

हर दिल का दर्पण हैं

हर राज छिपा होता है इनके सीने में

बस कोई पढ़ने वाला चाहिए ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract