दिल का दर्पण हैं खामोशियां
दिल का दर्पण हैं खामोशियां
कभी कभी खामोशियाँ भी
दिल का हाल बयाँ कर देती हैं
हमसे हमारा ही परिचय करा देती हैं
और हम मशगूल रहते हैं
कभी ज़िन्दगी की ज़रूरतों में
कभी अपनों को मनाने में
कभी उलझनों को सुलझाने में
मगर सच ये भी है कि
हमने कभी ज़रूरत ही नहीं समझी
अपनी खामोशियों को पढ़ने की
और ये भी इतना ही सच है कि
हमें कभी फुर्सत ही नहीं मिलती
इनसे गुफ़्तगू करने की
जिंदगी की कशमकश की दलदल में
इतना धंस चुके हैं
चाहकर भी इस भूलभुलैया से
कोई द्वार नज़र नहीं आता बाहर निकलने का
काश! हम समझ पाते कि खामोशियाँ
हमारे ही दिल का दर्द हमें बताती हैं
दिल की हलचलों से हमें रूबरू कराती हैं
ये खामोशियाँ सिर्फ़ खामोशियाँ नहीं
हर दिल का दर्पण हैं
हर राज छिपा होता है इनके सीने में
बस कोई पढ़ने वाला चाहिए
कभी कभी खामोशियां भी
दिल का हाल बयां कर देती हैं
हमसे हमारा ही परिचय करा देती हैं
और हम मशगूल रहते हैं
कभी जिंदगी की जरूरतों में
केभी अपनों को मनाने में
कभी उलझनों को सुलझाने में
मगर सच ये भी कि
हमने कभी जरूरत ही नहीं समझी
अपनी खामोशियों को पढ़ने की
और ये भी इतना ही सच है कि
हमें कभी फुर्सत ही नहीं मिलती
इनसे गुफ्तगू करने की
जिंदगी की कशमकश की दलदल
इतने धंस चूके हैं
चाहकर भी इस भूलभुलैया से
कोई द्वार नजर नहीं आता बाहर निकलने का
काश! हम समझ पाते कि खामोशियां
हमारे ही दिल का दर्द हमें बताती हैं
दिल की हलचलों से हमें रूबरू कराती हैं
ये खामोशियां सिर्फ खामोशियां नहीं
हर दिल का दर्पण हैं
हर राज छिपा होता है इनके सीने में
बस कोई पढ़ने वाला चाहिए ।
