STORYMIRROR

Vijaykant Verma

Abstract

4  

Vijaykant Verma

Abstract

दिल चाहता है

दिल चाहता है

1 min
448

दिल चाहता है

छू लूं तुझे

पढ़ लूं तुझे

और जान लूं मैं

तेरी भी ख्वाहिशें

तेरी भी हसरतें..


भूल से

कहीं ऐसा न हो

बसा हो कोई और

तेरी नजरों में

तेरे दिल में..


और तू

मजबूर होकर

इस समाज से डर कर

अपनी मोहब्बत को

दफन कर

बन जाए मेरी


पूरी जिंदगी सिसकने को

तड़पने को 

और आंसू बहाने को।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract