दिल और दिमाग
दिल और दिमाग
अपनों का जब निभाना हो साथ
तो करना केवल दिल की बात।
केवल दिल के भरोसे पर ना रहना
अपनी आंखों को भी खुली तुम रखना।
दिमाग का प्रयोग हमेशा करना
वरना तुम्हारे साथ हो जाएगा विश्वासघात।
दिल और दिमाग को साथ चलाना नहीं।
खुद को भ्रमित कराना नहीं।
व्यवहार सदा वैसा ही करना
जैसा दूसरा करता है जैसा तुम्हारे साथ।
अपनों को धोखा देना नहीं।
गैरों से धोखा खाना नहीं।
पहचान गैरों और अपनों की भी सीख लो।
क्योंकि कोई अपना बनकर ही तुम्हें देगा मात।
दिल और दिमाग दोनों को दुरस्त तुम रखना।
सही जगह पर प्रयोग तुम करना।
जिनसे व्यवहार करना है दिल से
उनके आगे कभी दिमाग प्रयोग मत करना।
कभी-कभी ऐसा भी होता है,
जीत जाते हो तुम तब भी
जबकि दुनिया को लगती है वह तुम्हारी हार।
