दीपक चन्दा तारे
दीपक चन्दा तारे
बङी सुहानी रात है झिलमिल,
चन्द्र और तारों की।
गहन अन्ध तम चीर रोशनी,
करे ज्योति दीपक की।
निशि के गहन अंधेरे मे,
दीपक चन्दा तारे कहते।
मन मे धीरज को धरो,
नहीं दिन सदा एक से रहते।
रजनी के बाद सबेरा है,
दुख के भी बाद खड़ा सुख है।
उन्नति भी हानि सहे मिलती,
जीवन संग आती मृत्यु है।
भय शोक रोग निर्बलता तज,
खुश अभय स्वस्थ तन सबल करो।
ज्ञान प्रकाश ह्रदय मे भरकर,
अज्ञान तिमिर को नष्ट करो।
दीपक सा खुद को बना,
जगत को रोशन करके जाना।
होगा सफल जन्म जग में,
रक्खेगा याद जमाना।
