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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

दीपदान कर

दीपदान कर

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दीप जलाओ, रात की छाया में,

उजाला फैलाओ, हर मन-माया में।

हर घर में खुशियों की झालर सजाऊँ,

संग प्रकाश के, अँधेरों को भुलाऊँ।  


दीपदान की ये रीति , दिल में बसा लो,

नेह का संदेश , सबको बता दो।

आशा की किरण , बिखेरो चारों ओर,

हर दिल में जगाओ, प्रेम का स्वर।  


सूरज की किरणों से , नहीं है डर,

स्वप्नों की दुनिया में, बुनो नई डगर।

समझो एक-दूसरे की बात , बढ़ाओ मित्रता,

दीप जलाकर करो , सारे मन का एकता।  


संदेश है प्रेम का, दीप की रोशनी में,

लुटाओ खुशी हर एक, जीवन की गहराई में।

जो चलें अँधेरों में, उन्हें राह दिखाओ,

दीपदान करके सबको, हंसते-खिलखिलाओ।


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