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SARVESH KUMAR MARUT

Abstract

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SARVESH KUMAR MARUT

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दीप से दीप जलाए रखना

दीप से दीप जलाए रखना

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दीप से दीेप को जलाए रखना,

दिलों को दिलों से मिलाए रखना।

          अंधकार न रहे किसी तरह का मनों में,

          हाथों को हाथों से मिलाए रखना।

हँसी-ख़ुशी से सब यहाँ पर रहे,

दीप (दिल) में प्रेम का तेल बनाए रखना।

          दीप से दीप से जलाए रखना,

          दिलों को दिलों से मिलाए रखना।।


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