STORYMIRROR

Ragini Singh

Inspirational

3  

Ragini Singh

Inspirational

""धूप"

""धूप"

1 min
165

झरोखे से छनकर आती हुई ये धूप

अपना सा कुछ गुनगुनाती हुई ये धूप

जैसे हो कुछ आधा सा आधा पूरा सा

ये अलहदा अहसास कराती हुयी ये धूप

अंतर्मन में कोलाहल सा मचाती हुई धूप

बाहर से शांत अनवरत चमचमाती हुई धूप

सांसों की तरह पल पल घटती जाती ये धूप

नया सवेरा लाने को हर शाम सो जाती धूप

जैसे हो जीवन का पूरा सार समझाती धूप

कुछ कानों में हमारे जैसे फुसफुसाती ये धूप

जी लो आज कल नहीं होगा समझाती धूप........



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational