SNEHA NALAWADE
Inspirational
हम और हमारा देश
हम जहाँ पर रहते हैं
जिस देश में रहते हैं
हमारे देश में अलग
अलग परंमपरा है
जहाँ पर अलग अलग
तरह के लोग रहते हैं
जहाँ पर अलग धर्म
और जाति के लोग हैं
उनकी सोच काफी
अलग होती है
जिसके चलते आगे
बहस होती है
हम बस एकता के साथ
मिल जुलकर रहे
लम्हे
त्याग...
वो पल...
फिर एक पहल रि...
नारी...
अध्यापिका...
बेरोजगारी...
बचपन...
एक सैनिक
वक्त....
नियम है न ऐसा बनाया गया । करम कर अधर्मी छिपाया गया॥ नियम है न ऐसा बनाया गया । करम कर अधर्मी छिपाया गया॥
मगर बड़ी उससे लकीर जब, उसके बगल खिंच जाती ।। मगर बड़ी उससे लकीर जब, उसके बगल खिंच जाती ।।
अपनी उचित सीमा जो कोई भूले। पछताए जीवन भर न मिले जीवन सार।। अपनी उचित सीमा जो कोई भूले। पछताए जीवन भर न मिले जीवन सार।।
समय का रखना अब पूरा ध्यान एक पल भी बर्बाद ना कर जान। समय का रखना अब पूरा ध्यान एक पल भी बर्बाद ना कर जान।
हर एक आँसू होता मोती, भेद आँसुओं का समझो। हर एक आँसू होता मोती, भेद आँसुओं का समझो।
मातृभाषा हिन्दी, विश्व पटल पर छायी। मातृभाषा हिन्दी, विश्व पटल पर छायी।
हौसलों की ऊँची उड़ान भरना देते हैं सिखा, ऐसे ही होते हैं पिता।। हौसलों की ऊँची उड़ान भरना देते हैं सिखा, ऐसे ही होते हैं पिता।।
मिसाइल मैन की जन्म से खुश हुआ था अंबर भी उस दिन। मिसाइल मैन की जन्म से खुश हुआ था अंबर भी उस दिन।
काम आएगी ईमानदारी तुम्हारी सब्र रखो। काम आएगी ईमानदारी तुम्हारी सब्र रखो।
हमारा प्यारा भारत देश महान। हम इसके हैं संतान। हमारा प्यारा भारत देश महान। हम इसके हैं संतान।
दोनों को नतमस्तक प्रणाम, जय जवान जय किसान।। दोनों को नतमस्तक प्रणाम, जय जवान जय किसान।।
हर युग एक रामायण लिखेगा, महाभारत दोहराया जाएगा।। हर युग एक रामायण लिखेगा, महाभारत दोहराया जाएगा।।
9 मई 1866 को रत्नागिरि में जन्मे, गोपाल कृष्ण गोखले महान विचारक। 9 मई 1866 को रत्नागिरि में जन्मे, गोपाल कृष्ण गोखले महान विचारक।
जब वक्त आयेगा तो अकेली सब पर है भारी। जब वक्त आयेगा तो अकेली सब पर है भारी।
शांतनु जी के इस सौभाग्यशाली पुत्र, हम सभी मिलकर करते बार बार नमन है।। शांतनु जी के इस सौभाग्यशाली पुत्र, हम सभी मिलकर करते बार बार नमन है।।
जब से गम को हंस के मैंने पी लिया तब से हर गम लगे मीठा मुझे। जब से गम को हंस के मैंने पी लिया तब से हर गम लगे मीठा मुझे।
हरे-भरे पेड़ हैं धरा के आभूषण, इनसे ही होता पर्यावरण सन्तुलन। हरे-भरे पेड़ हैं धरा के आभूषण, इनसे ही होता पर्यावरण सन्तुलन।
मधुर और भक्तिपूर्ण, भजनों को रचकर, किया मधुर गान। मधुर और भक्तिपूर्ण, भजनों को रचकर, किया मधुर गान।
भारतीय संस्कृति जग में छायी है, नमस्ते शब्द ने जग में धूम मचायी है।। भारतीय संस्कृति जग में छायी है, नमस्ते शब्द ने जग में धूम मचायी है।।
माँ तुझे फिर क्या बताऊँ आज मैं। बोझ ढोकर थक गई हूँ आज मैं।। माँ तुझे फिर क्या बताऊँ आज मैं। बोझ ढोकर थक गई हूँ आज मैं।।