देश की अर्थव्यवस्था को बगाड़ो मत
देश की अर्थव्यवस्था को बगाड़ो मत
देश के समक्ष और भी मसले बहुत हैं,
इन मसलों को तुम और बढ़ाओ मत।
जनसंख्या में अनावश्यक वृद्धि करके,
पेड़ों और वनों को तुम नष्ट करो मत।
बेटे और बेटी में बड़ा ही फर्क रखकर,
बच्चों की लम्बी कतारें लगाओ मत।
अपनी नादानी से मासूम बच्चों के,
भविष्य से खिलवाड़ तुम करो मत।
पानी,अनाज,बिजली,गैस,डीज़ल की,
बिनज़रूरी माँग को तुम बढ़ाओ मत।
देश की बेरोज़गारी और महंगाई को,
देखो यूँ ही तुम भी बढ़ाओ मत।
अपने बढ़ते परिवार की माँगों हेतु,
भ्रष्टाचार को देखो तुम बढ़ाओ मत।
अपने देश की अर्थव्यवस्था को,
देखो ऐसे ही तुम बिगाड़ो मत।
