डर के आगे जीत है
डर के आगे जीत है
जीवन में कुछ भी ना,
तुम कर पाओगे ,
अगर तुम,
खतरों से भय खाओगे।
हाथों में हाथ धरे,
घर में बैठ जाओगे ,
क्या ख़ाक पुरूष तुम,
फिर कहलाओगे।
डर डर कर जीना भी ,
कोई जीना है,
कठिन परिश्रम ही,
असल में इंसान का,
कीमती गहना है ।
हर डर को,
तुम हरा दो,
इस दुनिया को,
कुछ कर के दिखा दो।।
