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Harish Bhatt

Classics

4  

Harish Bhatt

Classics

डोर

डोर

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बिखरे मोती, टूट गई डोर

गांठ लगाओ या न लगाओ


अपनत्व तो हो चुका ध्वस्त.

कैसी लगी संतुष्टि को आग,


न बुझती है, ना दहकती है.

बस जल रहा है गांव- मौहल्ला


बचपन के दोस्त, मां का प्यार

छोड दिया बस नाम के लिए


लौटना भी कैसे, सूख गई माटी

रिश्ते पनपते नहीं बंजर जमीं में।


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