Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF
Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF

Preeti Praveen

Classics


5.0  

Preeti Praveen

Classics


बरखा आई

बरखा आई

1 min 795 1 min 795

धरती को दी एक निशानी अभी अभी

बादल लेकर आया पानी अभी अभी।


मौसम ने जो बातें मानी अभी अभी

छमछम आई बरखा रानी अभी अभी।


तपता गुलशन सारा महक उठा है,

नदियों में फिर आई रवानी अभी अभी।


कसक मिटी है इन सूखी रातों की,

पंछी गाते सुबह सुहानी अभी अभी।


"प्रीति" जगी है दिल का मौसम बोल उठा,

गीत ग़ज़ल लिखी कहानी अभी अभी।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Preeti Praveen

Similar hindi poem from Classics