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BIKASH KUMAR PANIGRAHY

Tragedy

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BIKASH KUMAR PANIGRAHY

Tragedy

ढूंढ़ते रह जाते

ढूंढ़ते रह जाते

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सफर में सहारा ढूंढ़ते रह जाते,

राहों में नज़ारा ढूंढ़ते रह जाते,

नज़रें मिलाये तुम तो लगा समंदर यही है;

वरना हम डूबने को किनारा ढूंढ़ते रह जाते।


मंजिल हमारा ढूंढ़ते रह जाते,

सफर दोबारा ढूंढ़ते रह जाते,

मुस्कान खिलाए तुम तो लगा मन्नत यही है;

वरना हम टूटता सितारा ढूंढ़ते रह जाते।


बरबादी तेरे कहर के ढूंढ़ते रह जाते,

असर तेरे जहर के ढूंढ़ते रह जाते,

बाहों में ले लिए तुम तो लगा दुनिया यही है;

वरना हम गालियाँ तेरे शहर के ढूंढ़ते रह जाते।


बेवक़्त पीने की वजह ढूंढ़ते रह जाते,

लफ़्ज़ों को सीने की वजह ढूंढ़ते रह जाते,

लबों से छुए तुम तो लगा जिंदगी यही है;

वरना हम जीने की वजह ढूंढ़ते रह जाते।


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