Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

BIKASH KUMAR PANIGRAHY

Classics

5.0  

BIKASH KUMAR PANIGRAHY

Classics

माँ की ममता

माँ की ममता

1 min
549


हर गम हर शिकवे को वो ऐसे भूला देती है,

रूठती रहती है माँ पर खाने को बुला देती है।


बड़ा सुकुन मिलता है वो मंज़र देखके मुझे,

जब चाँद दिखा कर बच्चे को माँ खिला देती है।


दुआ करती है हर रोज़ की मैं कामयाब बन जाऊं,

घर से निकल पड़ता हूँ तो रोती है और रुला देती है।


ग़ज़लों की धुन में ये महसूस होता है सदा,

की जैसे लोरी सुनाकर मुझे माँ सुला देती है।


काँधे पे सर रखता हूँ उसकी तो हर गम भूल जाता हूँ,

जहाँ में होता हूँ पर वो मुझे जन्नत से मिला देती है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics