दास्तान ए मोहब्बत
दास्तान ए मोहब्बत
कोकिल कंठी आम्ररस जैसी मधुर आवाज धारण करने वाली
स्वयं अम्बर की घटाओं से रस चुराने वाली
अधीर जिज्ञासा प्रकट करने वाली
अपनी अदाओं से दीवाना बनाने वाली
सपनों में यूं हलचल मचाने तथा चैन चुराने वाली
धरा पे प्रकट हुए कुसुम की तरह
शशि के शशि प्रभा की तरह
तड़ाग के नीरज की तरह
भानु कि रश्मि की तरह
सरिता कि धरा की तरह
हर जगह छाया तेरा सुरूर है तू ईश्वर का दिया वरदान है
तू ना हो तो दिन अधूरा रात अंधेरी शाम है
ये जहां तेरे नाम कर दूं ये ख्वाहिश सरेआम है

