STORYMIRROR

18.Sibasish Parida

Abstract

3  

18.Sibasish Parida

Abstract

अंतर्मुखी

अंतर्मुखी

1 min
204

भीड़ में खड़े हुए अकेलेपन का ख्वाब लेके

निहारते हुए घुलने मिलने कि इच्छा लेके

सबको देखते हुए एक छोटी सी आस लेके

चुप-चुप बैठे हुए सपने संजोने की आजमाईश लेके


दूर बैठे बस सोचते हुए 

ख्वाबों की दुनिया सहेजते हुए

नाच गानों को देखते हुए

यूं देख बस देखते हुए


बहिर्मुखियों को देखते हुए 

बस दिलासा देते हुए


वो दिन भी जल्द आएगा

बहुत जल्द आएगा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract