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Antariksha Saha

Tragedy Inspirational

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Antariksha Saha

Tragedy Inspirational

दादी

दादी

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धूल सी लिपटी परी है 

मखमल से नाजुक तेरी स्पर्श

आज भी दिल में ढोये जा रहा हूँ तेरा अक्स 

तू उन तारों में कही होंगी 

जब भी डरता हूँ असफल होता हूँ

तुझे याद करता हूँ

आज भी तू आती है 

आँखें मीचते सपनों के उस पार 


दादी ऐसी नसीबों से मिलता है 

बस यह क्लेश है 

जब सब बुरा चल रहा था 

तू थी साथ 

जब सब ठीक है 

तू छोड़ दी साथ 

देना चाहता था तुझे जितना प्यार 

अब देखो तू छोड़ गई उस पार 


काश थोड़ी और मोहलत होती हमारे साथ 

काश वह होती हमारे साथ 


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