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SHWETA GUPTA

Abstract

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SHWETA GUPTA

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चंदा या मामा

चंदा या मामा

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नहीं कहूँगा तुझको मामा, मैं तुझ तक उड़ कर आऊँगा

क्यों करूँ मैं तुझसे 'पुए' की बातें, मैं तुझपर जहां बसाऊँगा!


जब उतरूँगा तेरी सतह पर, हर दिन एक नई खोज करूँगा

पानी चंद्रयान ने था ढूँढा, मैं तो ऑक्सीजन को ढूँढूंगा।


देखूँगा तेरे हर हिस्से को, शायद जीवन के अवशेष मैं पाऊँ

सोच रहा हूँ उत्तरी ध्रुव पर, मैं अपनी बड़ी सी लैब बनाऊँ।


पढ़ना शुरू कर दिया मैंने, इसरो और नासा के बारे में

जीतूँगा मैं, तू हारेगा, यह बात समझ ले बस इशारे में।


बहुत हो गई अपनी बातें, चल रात हुई, मैं सो जाता हूँ

कल फिर तुझसे मिलकर मैं, मन भर के बतियाता हूँ।


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