चमत्कार सा
चमत्कार सा
चमत्कार सा लगता ही नहीं
है भी चमत्कार सा अस्तित्व
जाने कितने विचार
जाने कितनी योजनायें
जाने कितनी नीतियाँ
जाने कितनी ख्वाहिशें
जीवन का हिस्सा बनने को
लालायित।
जीवन के आसपास
तितलियों सी मंडराती हुयी
महसूस हो रहा है
अप्रसांगिक सन्दर्भो में
प्रसांगिक सा
कभी महसूस करें
इनकी छुअन
भर जायें इनके अभिदान से।
