चले ही जाना है
चले ही जाना है
इक दिन इस दुनिया से चले ही जाना है
तो हर पल किस बात का रोना है
कुछ भी नहीं ले जाएगा तू यहाँ से
तो फिर क्या पाना और क्या खोना है
उम्र बीत गई यह समझते-समझते
कि अंत में तो इस मिट्टी का ही होना है
ज़िन्दगी है बस दो पल का फ़साना
तो दिलों में नफ़रत का बीज क्यों बोना है
चैन की नींद न सो पाए हम , बेचैनी में जीते रहे
न जाना, इक दिन तो गहरी नींद ही सोना है।
