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Pratibha Bhatt

Abstract

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Pratibha Bhatt

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चले भोला ब्याह रचाने

चले भोला ब्याह रचाने

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सृष्टि का आरंभ ही शिव है अंत भी शिव है,

आदि और शक्ति का अलौकिक संगम है,

ब्रह्म- ज्ञान का अद्भुत केंद्र जीवन मर्म है । 


शिव - शक्ति से प्रकृति का हुआ प्रादुर्भाव है,

स्वयं -भू है जो अनादि से शंभु महाकाल है,

त्रिनेत्र धारी, महाराज नंदी जिनका वाहन है ।


मस्तक पर जिनके विराजे विराजे चंद्र है,

शोभित गले की माला में नाग वासुकी है,

हाथ कमंडल और त्रिशूल वृक्ष छाल वस्त्र है।


बेलपत्री, धतूरा , रुद्राक्ष - आंकड़े का हार है,

भभूत लपेटे भंडारी का अद्भुत हुआ श्रृंगार है ,

महादेव शिव - शंभू की लीला अपरम्पार है।


महाशिवरात्रि ब्याह रचाने चले भोला है,

तपस्या से तपित वो आदि स्वयं शक्ति है,

कोमल जिनका रूप और गौर रूप वर्ण है।


शिव और शक्ति - मिलन अद्भुतता से भरा है,

तीनों लोक में देखो हो रही जय जयकार है ,

आया पावन विह्नगम शिवरात्रि का त्यौहार है।


द्वार से जिनके कोई कभी न खाली जाता है,

मनवांछित फल के जो सिद्धि स्वयं - दाता है,

तीनों लोक में देवों के देव महादेव अधिदाता है।


अर्धनारीश्वर रूप में आएंगे आज शिव शक्ति,

पूरा ब्रह्मांड शिव शक्ति मय होए गूंज उठा है,

जगमग हो उठी कीर्ति मान चारों दिशाएं है।

हर - हर महादेव



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