STORYMIRROR

प्रीति प्रभा

Abstract

3  

प्रीति प्रभा

Abstract

चिठ्ठी

चिठ्ठी

1 min
174

बिन पते की कुछ चिट्ठियाँ

अक्सर मैं लिख देती हूँ

क्यों लिख रही हूँ

किसे लिख रही हूँ

भेजना कहाँ हैं

मालूम नहीं कुछ

बस मैं लिख दे रही हूँ

बिना किसी नाम पते की चिट्ठी

सोचकर यह की

जिस दिन वो मिलने आयेंगे

उस दिन मेरे इन चिट्ठियों को

नाम पता भी मिल जाएगा 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract