छू लेगें ये आसम़ा
छू लेगें ये आसम़ा
हाथों व हुनर की ताकत,
जब ख़त्म हो जाती है,
तब मनुष्य हथेली में,
अपना भविष्य ढूंढ़ता है,
कुछ मिलना, या ना मिलना,
तो दोस्त, किस्मत की बात है,
पर कोशिश तो करनी ही है, यारो,
आज नहीं तो कल छू लेंगे ये आसमां,
ख्वाहिशों की पतंग,
उड़ाते रहना बाकी है,
नहीं होगा कुछ हासिल,
यूँ ठहर जाने से,
माना सफर है मुश्किल,
राहें हैं कठिन,
पर निरंतर चलते जाना है,
आगे बढते चले जाना है।।
