STORYMIRROR

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Inspirational

4  

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Inspirational

आदत भी नहीं पीने की

आदत भी नहीं पीने की

1 min
267

उन चंद लम्हों की सिराईं को

कौन याद करता है,


नई वसंत ए बहार पर

कौन सा पात फिर अपना है।


न दिल लगाया किसी से।

ना गम की शौगात मिली।


आदत भी नही पीने की।

फिर जाने क्यों लत पड़ी लिखने की।

ना पहले कभी समझा था,


ना अब समझता हूं मोहब्बत को।

ना कभी तकरार ना ऐतबार हुआ,

लिखता हूं कि जैसे प्यार हुआ।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational