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Satish Chandra Pandey

Inspirational

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Satish Chandra Pandey

Inspirational

छोड़ मनुज निंदा की बातें

छोड़ मनुज निंदा की बातें

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निन्दारत रहना नहीं, निंदा जहर समान,

निन्दारत इंसान का, कौन करे सम्मान।

कौन करे सम्मान, सभी दूरी रखते हैं,

निन्दारत को देख, सब मन में हंसते हैं।

कहे लेखनी छोड़, मनुज निंदा की बातें,

अपने में रह मगन, न कर दूजे की बातें।


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