छोड़ ना देना।
छोड़ ना देना।
मेरे गुरुवर !अब मुझको ना इतना तड़पाओ तुम।
जब से देखा मैंने तुमको ,होश हो गए मेरे गुम।।
घुटी पिलाई प्रेम की ऐसी ,जी कभी नहीं भरता है।
खाली समय जब भी मिलता, याद तुम्हीं को करता है।।
जब जब छाया घना अंधेरा, प्रकाश तुम ही दिख लाते हो।
पर मैं पागल समझ न पाता, सपनों में दरश दिखाते हो।।
साधना को अब तक समझ ना पाया ,कैसे इसको करते हैं।
जब भी होता सम्मुख तुम्हारे, तुमको ही देखा करते हैं।।
नाथ !इस अनाथ की एक ही मिन्नत, जो तुमसे किया करता है।
छोड़ ना देना तनहा "नीरज" को पल -पल आहें भरता है।।
