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Praveen Gola

Tragedy

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Praveen Gola

Tragedy

चाँद में भी दाग है

चाँद में भी दाग है

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निहार कर उसे ....जब चाँद पर नज़र गई यूँ ही ,

चाँद में दाग दिखा ....इतने में वो भी चल दिया।

आज खत्म हुआ था ,अपना सालों का रिश्ता ,

मैने ऐसे ही कई सालों से ,चाँद को अर्ध्य दिया।

उन कसमों का भरम ,टूटा देर से ही ,

व्रत में छिपी वो दीर्घायु ,अब झूठी थी हुई।

जो मेरा ही ना रहा ,उसकी उम्र को भला ,

मैं चाँद से माँग कर भी ,क्या रहूँगी अब खुश सदा ?

बैरी चाँद हुआ ....उसका साथ गया ,

चाँद में भी दाग है ,ये पता आज चला।।


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