Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Amitosh Upadhyay "amit"

Romance


2  

Amitosh Upadhyay "amit"

Romance


चाहत

चाहत

1 min 313 1 min 313

थक गया हूँ खुद से लड़कर सोना मैं चाहता हूँ

तेरे हसीन ख़्वाबों में खोना मैं चाहता हूँ


यादें मेरे माज़ी की पीछा ना छोड़े मेरा,

उन्हें वक्त के धागों में पिरोना मैं चाहता हूँ


लम्हे जो गुज़ारे थे हाँ साथ-साथ हमने

उन्हें याद करके पलकें भिगोना मैं चाहता हूँ


पूरी जगह जो ना दे फिर भी नहीं कोई ग़म,

दिल में तेरे तो बस एक कोना मैं चाहता हूँ


मुमकिन नहीं है अब ये फिर भी यही है चाहत,

एक बार फिर से तेरा होना मैं चाहता हूँ।।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Amitosh Upadhyay "amit"

Similar hindi poem from Romance