STORYMIRROR

Umakant Yadav

Romance

3  

Umakant Yadav

Romance

बसन्ती पवन

बसन्ती पवन

1 min
274

ये बसन्ती पवन

रुको ठहरो देखों तो

कानन में सारंग की मस्ती

होली में रंगबहारों की मस्ती


देखो गीत खुशी के गाये उपवन

खुशहाल हुये धरती के बन

पशु पक्षी गीत खुशी के गाते

सरसो के फूल खेतों में लद जाते


सब दिखता पीला पीला

अब न ठंडी से कुछ गीला

चारों ओर मौसम लुभावना

पुकारती सजनी को सजना


हम भी तुम भी

कुछ बोलो तो

ये बसंती पवन

रुको ठहरो कुछ बोलो तो।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance