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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Inspirational

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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Inspirational

बसंत का स्वागत

बसंत का स्वागत

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धरा सजी है फूलों से,

हरियाली ने ओढ़ा चोला।


कोयल गाए मीठे गीत 

भंवरों ने संगीत गजब है घोला।


संग पवन के गाए सरिता 

देख ये सब मन डोला।


झूम उठी धरती सारी

हर ओर पत्ता पत्ता बोला


सुनहरी धूप गुनगुनी आई,

दुल्हन सी प्रकृति शरमाई।


सरसों की पीली चुनर बिछ गई 

मन में एक नई आस जगाई।


ठिठुरन सर्दी की मंद हो गई 

बंद हो गई अब रजाई।


ओस की बूंदों संग नई सुबह में

अद्ध कली भी सकुचाई।


नदी का पानी, बहता कल कल 

बसंत संग बहके, ये मन चंचल।


धरती का हर कोना बोले 

हर ओर है, मधुमास की हलचल।


आओ मिलकर गाएं हम,

बसंत के सुंदर, सजे सरगम।


नवजीवन का, यह प्यारा उत्सव

रंगों से भर दे, इस जग को हम।


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