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Sanjukta Praharaj

Romance

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Sanjukta Praharaj

Romance

बस इतनी सी कहानी

बस इतनी सी कहानी

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बस इतनी सी कहानी है हमारी

वो कॉफी के दीवाने,

और मैं ठहरी चाय की मरीज़ |

मगर फिर भी,

बातें हमारी घुलती रहीं,

जैसे सुबह की ओस में धूप की ताज़गी।


वो कहते, "कॉफी में कड़वाहट कमाल की होती है,"

मैं मुस्कुराकर जवाब देती,

"चाय में मिठास, अपनापन घुला होता है।"

बस, यूँ ही बहस चलती रही,

कभी चाय जीती, कभी कॉफी मुस्काई।


कितनी ही शामें बीत गईं,

एक ही टेबल पर, दो अलग-अलग प्याले रखते हुए,

पर मन के कप में,

हमेशा संग ही चुस्कियाँ भरते हुए।


फिर एक दिन यूँ हुआ,

बेमौसम बारिश ने दस्तक दी,

वो मेरी चाय की चुस्की चुराने लगे,

और मैंने उनकी कॉफी से दोस्ती कर ली।


शायद यही तो इश्क़ था,

अलग होकर भी साथ रहने की खूबसूरती,

चाय और कॉफी की तरह,

जो भले ही जुदा हों,

पर एक ही ठिकाने पर मिलते हैं,

हर दिल के कैफ़े में,

हर किसी की कहानी में।


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