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Sanjukta Praharaj

Romance

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Sanjukta Praharaj

Romance

आखिरी मुलाक़ात

आखिरी मुलाक़ात

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आखिरी बार आप कुछ इस तरह मिल जाना,

मुझको रख लेना या फिर मुझमें ही रह जाना।


ना कोई सवाल हो, ना कोई जवाब,

बस एक ख़ामोश मुलाक़ात हो बेहिसाब।

नज़रों से कह देना जो लफ़्ज़ न कह पाए,

दिल की गहराइयों में इक शाम ठहर जाए।


हवा के बहाने हाथ छू लेना,

सांसों में अपनी महक छोड़ देना।

जो बीते लम्हे अधूरे रहे,

उनको एक पल में पूरा कर देना।


अगर बिछड़ना ही मुक़द्दर में लिखा है,

तो इस  बार यूँ बिछड़ जाना,

की ख़ुद को भी हम में छोड़ जाओ,

या फिर हम में ही रह जाना।


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