STORYMIRROR

Yogeshwar Dayal Mathur

Abstract Inspirational

4  

Yogeshwar Dayal Mathur

Abstract Inspirational

बोझिल जिंदगी

बोझिल जिंदगी

1 min
426

उम्र के ढलते मौसम में

एक सवाल जहन पर हावी है

शुरुआत तो हल्की फुल्की थी

फिर जिंदगी बोझिल कैसे बनी


जहन पर ज़रा सा ज़ोर दिया

पुलिंदे की परतें खुलने लगीं

अपने अंदर अहसास हुआ

ज़हीन जवाब तलब हुआ


कुछ दिल में दबी बातें थीं

कुछ अपने हमसे मिले नहीं

कुछ ला हासिल ख्वाहिशें थी

कुछ तमन्नाएं जो बुझी नहीं

कुछ शिकवे कभी सुलझा न सके

खताएं भी इसमें शामिल थीं


इस दौर में सुकून जरूरी है

दबिश कम करने की ख्वाहिश है

सबका मुआवजा देने को

ज़मीर हमारे साथ नहीं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract