बंटवारा
बंटवारा
जमीन बंट गई, जायदाद बंट गई
और तो और
पिता बंट गए माँ बंट गई
पिता तेरे माँ मेरी,
बहन तेरी बुआ मेरी।
लोभ के इस बंटवारे ने,
पिता का दिल तोड़ दिया।
पिता ने एक रात जग छोड़ दिया।
उस रात ऐसे सोये कि,
सुबह ही नहीं हुई।
माँ अकेली रह गई।
माँ रोती,
पिता को उलाहना देती।
बिना कुछ कहे चले गए,
मुझे साथ क्यों ना ले गए।
काश मुझे भी साथ लिया होता,
ये बंटवारा तो खत्म हुआ होता।
अब मेरा फिर बंटवारा होगा,
मेरा ठिकाना कभी यहां कभी वहां होगा
तुम्हारा श्राद्ध कभी यहाँ,
तो कभी वहाँ होगा।
सच में वही हुआ,
माँ का बंटवारा हुआ।
छः महीने माँ मेरी,
छः महीने माँ तेरी।
जिस घर बीमार होगी,
इलाज वही करायेगा।
जिस घर रहेगी,
दवा वही दिलायेगा।
माँ बच्चों की इस सोच पर सोचती है
बच्चों को पाला पोसा,
बड़ा किया
दिन महीनों की गिनती बिन
सदा लाड़ प्यार दिया।
बीमारी में रात भर,
सिहराने बैठ कर,
दवा दुआ वात्सल्य दिया।
लोभ ने इन्हें इतना अंधा कर दिया,
ममतामय बचपन को पल में भुला दिया,
अपनी जननी को महीनों में बांट दिया।
