बन्द दरवाज़ा
बन्द दरवाज़ा
बन्द दरवाज़ा, घर का हो या दिल का
अक्सर बहुत रुलाता है।
घर का तो खुल भी जाएगा एक दिन
पर दिल का कौन खुलवायेगा?
इस दो दिन की जिंदगी में
क्यों इतने बैर मोल लेते हो?
भरोसा पल भर का नहीं होता है
वैर कई जन्मो के बांध लेते हो।
दरवाजे पे लगे इस ताले को हटाओ,
दिल पे जमे मैल को भी मिटाओ,
इस मुश्किल से मिले मानव जन्म को
यूं कौड़ियों के भाव तो न लुटाओ।
