Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

अच्युतं केशवं

Abstract

5.0  

अच्युतं केशवं

Abstract

बज गये पाँच

बज गये पाँच

1 min
174


बज गये पाँच 

उतर लिए

ऑफिस की सीढ़ियाँ 

बीत गया एक और दिन।

 

ऑफिस से घर को जोड़ती 

कहीं चौड़ी  

कहीं सँकरी सड़क 

सड़क के दोनों ओर 

छितराया जीवन।

 

मौन-बतकही 

प्यार-नफरत 

खुशी-गम 

सबकी सुध लेते 

बेसुध से हम 

डूब गया सूरज।

 

बीत गयी साँझ 

आगे है 

सपनों वाली रात 

कल फिर एक नया 

काम जुटा दिन।


Rate this content
Log in