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Shayra dr. Zeenat ahsaan

Abstract

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Shayra dr. Zeenat ahsaan

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बिसात

बिसात

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उनके मिजाज़ से है अपना मिजाज़ हट कर

आखिर को रह गए हम एक दूसरे से कट कर

खूने जिगर लगाकर जीती थी दिल की बाज़ी

उल्फत के दुश्मनों ने रखदी बिसात उलटकर!


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