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Dr.Deepak Shrivastava

Abstract

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Dr.Deepak Shrivastava

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बिरहन

बिरहन

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बारिश तुम

यूँ ही बरसती रहो

मुझ बिरहन के दर्द को

तुम समझती हो

सावन आया

वो ना आये

साजन ना आये

जिनके पिया से मिलन

को तरसती हों 

इस तड़पन को 

तुम समझती हो

बूंदों के संगीत से

मन को बहलाती हो

जीवन का गीत

सुनाती हो

आएंगे इंतजार करो

यही सिखलाती हो

तुम्हारे आने से

आस ये बंधती है

जैसे प्रकृति हर्षाती है

मुझ पर भी

ख़ुशी छा जाती है

बारिश तुम्हारे आने से

 तन की तपन बुझ जाती है

मन की उलझन को

 सह कर भी

तुम्हारे आने से

 पिया के आने की एक

 आस सी बंध जाती है।


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